उज्जायी प्राणायाम – Ujjayi Pranayama in Hindi

उज्जायी शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जो दो शब्दों के संधि से बना है – ‘उद्द + जी‘ जहाँ ‘जी‘ शब्द का मतलब है ‘जीतना‘ तथा ‘उद्द‘ शब्द का मतलब है ‘बंधन‘। अर्थात उज्जायी प्राणायाम हमें बंधनों पर विजय दिलाता है। 

योग शास्त्रों के अनुसार शरीर में गले से सम्बंधित समस्त रोगों के लिए उज्जायी प्राणायाम एक रामबाण के समान है बस जरूरत है तो इसको ठीक प्रकार से करने की।

हमारे इस लेख के माध्यम से आप जानेगें की उज्जायी प्राणायाम के लाभ क्या है, हमें उज्जायी प्राणायाम करते दौरान क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए साथ ही साथ अधिकतम लाभ पाने के लिए आप उज्जायी प्राणायाम कब करें।    

उज्जायी प्राणायाम के फायदे – Benefits of Ujjayi pranayama in Hindi

  • नियमित अभ्यास थायरॉइड के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है| यह देखा गया है कि उज्जायी प्राणायाम के अभ्यास से थायरॉइड नियंत्रित ही नहीं बल्कि पूरी तरह से ठीक हो जाता है|    
  • यदि कोई बच्चा या अन्य उम्र का व्यक्ति हकलाने (stammer) या तुतलाने जैसी समस्याओं से जूझ रहा है तो उसके लिए यह प्राणायाम रामबाण माना गया है| 
  • संगीत का रियाज करने वाले संगीतकारों के लिए यह प्राणायाम वरदान के समान है क्योंकि उज्जायी के अभ्यास से आवाज में मधुरता आती है|  
  • गले में एलर्जी तथा इन्फेक्शन जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है|
  • यदि आप सोते समय बहुत खर्राटे (Snoring) लेते हैं या सोते समय आप श्वास के रुकने (Sleep apnea) जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं तो आपको उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए इससे आपको बहुत लाभ मिलेगा| 
  • गले में सूजन, दर्द, पैरालिसिस (Paralysis) या गले का बैठ जाने जैसी समस्याओं के लिए भी यह प्राणायाम बहुत कारगर है|
  • बच्चों में टॉन्सिल (Tonsile) तथा मम्प्स (Mumps) की समस्याओं को दूर करता है|  
  • लोगों के अनुभव से यह देखा गया है कि उज्जायी प्राणायाम बुजुर्गों में होने वाले पार्किंसन रोग (Parkinson disease) में भी बहुत कारगर है| 

इस प्रकार उज्जायी प्राणायाम गले के हर रोगों के लिए रामबाण के समान है| परन्तु इसका अधिकतम लाभ पाने के लिए यह आवश्यक है कि आप इसका सही तरीके से नियमित अभ्यास करें|

आइये अब हम जानतें हैं कि उज्जायी प्राणायाम करने की सही विधि क्या है तथा इसका अधिकतम लाभ पाने के लिए हमें क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए| 

उज्जायी प्राणायाम कैसे करें  – Ujjayi pranayama steps in Hindi

  • किसी भी प्राणायाम अथवा योग क्रिया का अभ्यास करने के लिए आपको सबसे पहले किसी ऐसी साफ सुथरी जगह का चुनाव करना चाहिए जहाँ ताज़ी हवा आती हो और सूर्य का प्रकाश पहुँचता हो साथ ही साथ यदि आसपास पेड़ पौधे मौजूद हों तो ऐसा स्थान प्राणायाम के लिए बहुत अच्छा रहेगा| 
  • जमीन पर आसन (जैसे – योग मैट, चटाई अथवा दरी) बिछा लें और पद्मासन, सुखासन या वज्रासन की अवस्था में बैठ कर हाथों को ध्यान या वायु मुद्रा में घुटनों पर रख लें| 
  • अपनी रीढ़ की हड्डी तथा गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें।
  • 2, 3 बार गहरी लम्बी श्वास लें मन को शांत करें और चित्त को वर्तमान अवस्था में ले आइए|  
  • अब गले में खरखराहट जैसी आवाज करते हुए गहरी और लम्बी श्वास भरें श्वास पूरी तरह भर जाने के बाद यथाशक्ति श्वास को रोक कर रखें और ठुड्डी को अपने सीने से सटा लें|
  • जब श्वास छोड़ने को हो तो गर्दन को सीधा करके अंगूठे से दायीं नासिका को बंद करके बायें नासिका से धीरे धीरे सहज तरीके से श्वास छोड़ें|   

इस प्रकार उज्जायी प्राणायाम का एक सेट पूरा होता है, शुरुआत में आप अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करें बाद में अभ्यास के साथ अपनी अवधि को बढ़ाएं|   

योग गुरू बाबा रामदेव के अनुसार उज्जायी प्राणायाम बच्चे एक बार में 7 बार तथा व्यस्क 11 से 21 बार कर सकतें हैं। वैसे तो यह एक बहुत ही सरल और सहज तरीके से किये जाने वाला प्राणायाम है पर विशेष शारीरिक समस्याओं में इसका अभ्यास किसी योग गुरु अथवा डॉक्टर से सलाह लेनें के बाद ही करना चाहिये। 

आइये अब हम उज्जायी प्राणायाम के कुछ सावधानियों के बारे में जानते हैं…

उज्जायी प्राणायाम के दौरान सावधानियाँ – Precautions for Ujjayi pranayama

  • महिलाओं को गर्भधारण या मासिकधर्म के दौरान प्राणायाम का अभ्यास डॉक्टर के सलाह के बाद ही करना चाहिये। 
  • यदि हाल ही में आपका कोई ऑपरेशन हुआ है तो अभ्यास ना करें| 
  • यदि आप पहले से किसी गंभीर बिमारी से ग्रसित हैं तो किसी योग गुरू अथवा डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही इसका अभ्यास करें| 
  • प्राणायाम का अभ्यास खाली पेट अथवा खाने के 1, 2 घंटे बाद ही करें अन्यथा इसका विपरीत प्रभाव देखना पड़ सकता है।  
  • यदि अभ्यास के दौरान आप असहज या बेचैनी महसूस कर रहें हैं तो प्राणायाम करना तुरन्त रोक दें।   

उज्जायी प्राणायाम कब करें – When to do Ujjayi pranayama

उज्जायी या कोई भी प्राणायाम करने का सबसे उचित समय भोर का माना गया है परन्तु यदि भोर में उठ पाना संभव नहीं है तो आप सुबह जल्द से जल्द प्राणायाम कर लें।

यदि जीवनशैली के कारण प्राणायाम सुबह कर पाना संभव न हो तो आप शाम को खाने के 2, 3 घंटे बाद भी उज्जायी प्राणायाम कर सकते हैं| 

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