शीतकारी प्राणायाम – Sheetkari Pranayama in Hindi

शीतकारी प्राणायाम, शीतली प्राणायाम के समान ही शरीर तथा मन को ठंडक पहुँचाता है परन्तु शीतकारी प्राणायाम करने की विधि शीतली प्राणायाम के अपेक्षा काफी सहज और सरल है। कुछ लोगों को शीतली प्राणायाम करने के दौरान जीभ को नली के आकार में मोड़ने में तकलीफ होती है, उनके लिए यह प्राणायाम काफी उपयोगी होता है।

आइये, इस लेख के माध्यम से जानतें हैं कि शीतकारी प्राणायाम करने की विधि क्या है, इसके लाभ क्या हैं  तथा अधिकतम लाभ पाने के लिए हमें क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।    

शीतकारी प्राणायाम के लाभ – Sheetkari Pranayama benefits in Hindi

  • शीतकारी प्राणायाम शरीर की अम्लीयता को कम करता है जिससे एसिडिटी, गला जलना, पेट में जलन होने जैसी पित्त सम्बंधित समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
  • यदि आपको अक्सर मुँह के छाले होतें हैं तो आपको शीतकारी का अभ्यास करना चाहिए।
  • यदि आपको आवश्यकता से अधिक भूख और प्यास लगती है तो इसका अभ्यास आपके लिए काफी उपयोगी होगा।
  • अत्यधिक क्रोध, बेचैनी, व्यर्थ की चिंता, आदि मानसिक विकारों में शीतकारी प्राणायाम काफी लाभदायक होता है।
  • मन को शांत करता है तथा एकाग्रता को बढ़ाता है।
  • यदि आपको बहुत पसीना आता है तो शीतकारी का नियमित अभ्यास आपके लिए काफी फायदेमंद होगा।
  • मुख से दुर्गन्ध आना और पायरिआ जैसे मुख से संबधित विकारों को दूर करने में यह प्राणायाम काफी उपयोगी सिद्ध होता है।
  • बवासीर रोग को दूर करता है।
  • यदि आपको गर्मी के मौसम में बहुत बेचैनी होती है तो यह  प्राणायाम आपके लिए रामबाण के सामान है।
  • अक्सर काम के वजह से तनाव तथा चिंता में रहने वाले लोगों के लिए शीतकारी प्राणायाम काफी लाभदायक होता है।

शीतकारी प्राणायाम कैसे करें – Sheetkari Pranayama Kaise karein

  • सर्वप्रथम किसी ऐसी जगह का चुनाव करें जहाँ ताज़ी हवा तथा सूर्य का प्रकाश पहुँचता हो साथ ही यदि ऐसे स्थान पर पेड़ पौधे उपस्थित हों तो आयुर्वेद के शास्त्रों में ऐसी जगह प्राणायाम करने के लिए उपयुक्त बतायी गई है। 
  • अब जमीन पर आसन बिछा लें, इसके पश्चात सुखासन, पदमासन या वज्रासन की अवस्था में बैठ जायें, यदि जमीन पर बैठने में तकलीफ हो तो आप यह प्राणायाम लकड़ी की कुर्सी पर बैठ कर भी कर सकतें हैं। किसी भी अवस्था में बैठते हुए आपको यह ध्यान रखना है कि शरीर का कोई भी हिस्सा सीधे दिवार या जमीन को स्पर्श न करे।
  • अब हाथों को अपने घुटने पर रखें यदि आप चाहें तो ध्यान मुद्रा, वायु मुद्रा या अन्य कोई मुद्रा बना कर भी हाथों को घुटने पर रख सकतें हैं। 
  • आँखों को बंद करके गहरी सांस लें और मन को स्थिर करें।
  • अब अपने ऊपर और नीचे के जबड़ों के दांतों को आपस में सटा कर “सी… ” की आवाज करते हुए धीरे धीरे  गहरी सांस मुँह से अंदर भरें।  
  • मुँह को बंद कर लें , थोड़ी देर यथाशक्ति सांस को रोक कर नासिका द्वारा सांस को धीरे धीरे बाहर छोड़ें। 
  • इस प्रकार शीतकारी प्राणायाम का एक अभ्यास पूर्ण होता है, अधिकतम लाभ पाने हेतु आप इस प्राणायाम का एक बार में 5 से 11 बार तक अभ्यास कर सकतें हैं। 

शीतकारी प्राणायाम की सावधानियाँ – Precautions for Sheetkari Pranayama in Hindi 

  • शीतकारी प्राणायाम  प्राकृतिक रूप से शरीर में ठंडक देता, इसलिए शस्त्रों के अनुसार शीतकारी प्राणायाम गर्मियों के मौसम में ही करना श्रेष्ठ होता है, यदि आप जाड़े के मौसम में शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करेंगें तो अनायास ही आपको जुकाम होनें का खतरा बढ़ सकता है।   
  • यदि आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही इस प्राणायाम का अभ्यास करें।
  • सर्दी जुकाम होनें पर शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास न करें।
  • यदि आपको कफ की समस्या रहती है तो शीतकारी प्राणायाम का कम ही अभ्यास करें अन्यथा कफ का प्रभाव आपके शरीर में बढ़ सकता है।
  • किसी संक्रमित बीमारी से ग्रस्त होने पर शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास बुरे प्रभाव दे सकता है। अतः संक्रमण के दौरान इस प्राणायाम का अभ्यास न करें। 
  • गर्भवती महिलाएं डॉक्टर से परामर्श लेकर ही शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास करें।
  • यदि आप निम्न रक्तचाप के रोग से ग्रसित हैं तो शीतकारी प्राणायाम आपके लिए घातक हो सकता है। अर्थात निम्न रक्त चाप की अवस्था में शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास न करें।        

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