शीतली प्राणायाम – Sheetali Pranayama in Hindi

शीतली प्राणायाम शरीर के अत्यधिक बढ़े हुए तापमान को कम करनें के लिए काफी कारगर प्राणायाम है, यदि आप अत्यधिक गर्म मौसम के कारण बहुत अधिक बेचैनी या घबराहट महसूस कर रहें हैं तो आपको नियमित रूप से गर्मी के मौसम के दौरान शीतली प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए।

शीतली प्राणायाम (Cooling Pranayama) न केवल शरीर को बल्कि मस्तिष्क को भी शीतलता प्रदान करता है जिससे क्रोध, तनाव, घबराहट, अत्यधिक विचार आने वाली जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

इस प्रकार शरीर में बढ़ी हुयी गर्मी के कारण शरीर में उत्पन्न होने वाले रोगों के लिए शीतली प्राणायाम एक रामबाण के समान कार्य करता है।

आइये, इस लेख के माध्यम से जानतें हैं कि शीतली प्राणायाम (Cool Breathing exercise) के नियमित अभ्यास से हमें क्या लाभ मिलतें हैं तथा अधिकतम लाभ पाने के लिए शीतली प्राणायाम कैसे करना चाहिए तथा हमें क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए। 

शीतली प्राणायाम के फायदे – Sheetali Pranayama benefits 

  • शीतली प्राणायाम का नियमित अभ्यास शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और बढ़े है हुये पित्त के प्रभाव को कम करता है।
  • मस्तिष्क को ठंडक प्रदान करता है जिससे कुछ ही दिनों में आप क्रोध और तनाव में कमी महसूस करेंगें।
  • बढ़े हुये रक्तचाप को नियंत्रित करता है तथा शरीर द्वारा संक्रमित रोग पकडनें की सम्भावना को कम करता है।
  • यदि आप बवासीर रोग से पीड़ित हैं तो शीतली प्राणायाम का नियमित अभ्यास आपके लिए काफी उपयोगी होता है।
  • नियमित अभ्यास शरीर से अत्यधिक पसीनें के स्राव को कम करता है।
  • अत्यधिक तनाव (Hypertension) को कम करता है।
  • मन को शांत तथा एकाग्र करता है।
  • घबराहट तथा व्यर्थ का विचार करने वाले लोगो के लिए यह प्राणयाम बहुत कारगर है।
  • यदि आप प्रायः चेहरे पर दानें और मुँह के छाले से परेशान रहतें हैं तो शीतली प्राणयाम काफी लाभदायक होता है।
  • यदि आपको गर्मी के मौसम में बहुत बेचैनी होती है तो प्राकृतिक रूप से ठंडक पानें के लिए शीतली प्राणायाम काफी फायदेमंद होता है।

     

शीतली प्राणायाम कैसे करें – Sheetali Pranayama kaise kare

सर्वप्रथम किसी ऐसी साफ़ सुथरी खुली जगह का चुनाव करें जहाँ सूर्य का प्रकाश पहुँचता हो तथा आसपास यदि पेड़ पौधे मौजूद हों तो प्राणायाम अभ्यास के लिए ऐसा स्थान सर्वश्रेठ माना गया है।

अब जमीन पर आसान बिछा लें, ध्यान रहे प्राणायाम करते दौरान शरीर का कोई भी भाग जमीन अथवा दिवार के सम्पर्क में न आये। 

आसान पर पद्मासन, सुखासन अथवा वज्रासन की अवस्था में बैठ जाइये, ध्यान, वायु या कोई अन्य मुद्रा बना कर घुटनों पर हाथ रख लें 2, 3 बार गहरी श्वास लें और मन को शांत करें।

अब अपनी जीभ को मोड़ कर मुँह से लम्बी श्वास अपने फेफड़े में भरें और यथाशक्ति श्वास को रोक कर रखें।

यदि जीभ मोड़ने में परेशानी हो रही हो तो मुँह में “o” का आकार बना कर भी श्वास खींच सकतें हैं। 

अब श्वास को धीरे धीरे नाक से छोड़ दें।

इस प्रकार शीतली प्राणायाम की प्रक्रिया पूरी होती है।

आप इस प्राणायाम का अधिकतम लाभ पानें के लिए एक बार में 5 से 11 बार इस प्रक्रिया को दोहरा सकतें हैं। 

शीतली प्राणायाम की सावधानियाँ – Precautions for Sheetali Pranayama

शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुँचाने वाला प्राणायाम है इसलिए इसका अभ्यास केवल गर्मी के मौसम में ही करना चाहिए अन्यथा सर्दी के दिनों में इसके अभ्यास से आपको अनायास ही जुकाम का सामना करना पड़ सकता है।

यदि आपको पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो प्राणायाम का अभ्यास करनें के पूर्व डॉक्टर से सलाह अवश्य ले लें।

यदि आपको सर्दी जुकाम के लक्षण हैं तो शीतली प्राणायाम का अभ्यास न करें।

यदि आपका शरीर कफ प्रधान है तो यह प्राणायाम आपको ज्यादा नहीं करना चाहिए।

किसी संक्रमित बीमारी की अवस्था में प्राणायाम का अभ्यास न करें। यह प्राणायाम रक्तचाप को कम करनें वाला होता है इसलिए निम्न रक्तचाप के  रोगी को शीतली प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।  

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