कपालभाति प्राणायाम – Kapalbhati pranayama in Hindi

कपालभाति (Kapalbhati) शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिल कर बना है – कपाल + भाति। जहाँ कपाल शब्द का तात्पर्य माथे से है और भाति शब्द का तात्पर्य है चमक अर्थात कपालभाति महर्षि पतंजलि द्वारा बताये गए प्राणायामों में एक ऐसा प्राणायाम है जिसके नियमित अभ्यास से हमारे चेहरे पर अलौकिक तेज (चमक) आता है|

कुछ लोग अज्ञानवश कपालभाति (Kapalbhati) को कपालभारती (Kapalbharti) प्राणायाम भी बोलतें हैं, यह दोनों एक ही प्राणायाम का नाम है अतः आपको दोनों शब्दों में भ्रमित नहीं होना चाहिये|   

योग गुरू बाबा रामदेव ने इस प्राणायाम को बहुत महत्व दिया है उनके अनुसार कपालभाति एक बहुत ही चमत्कारी प्राणायाम है जिसका नियमित रूप से अभ्यास करके हम शरीर के 99% रोगों से मुक्ति पा सकतें हैं|   

कपालभाति प्राणायाम हमारे शरीर की अशुद्धियों को दूर करके शरीर को स्वच्छ और निर्मल बनाता है साथ ही साथ मन को शान्त करके हमें आध्यात्म की ओर प्रेरित करता है|

आईये इस लेख के माध्यम से विस्तार में जानतें हैं कि कपालभाति प्राणायाम के लाभ क्या हैं (kapalbhati ke faydebenefits of kapalbhati in hindi), कपालभाति कैसे और करें (kapalbhati yoga kaise kare) और अभ्यास के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिये|

कपालभाती प्राणायाम के फायदे – kapalbhati benefits in hindi

स्वामी रामदेव के अनुसार कपालभाति प्राणायाम आपके शरीर के 99% रोगों को दूर कर सकता है| आयुर्वेद के अनुसार शरीर की सभी बीमारियाँ हमारे पेट से ही शुरू होतीं हैं|

यदि आपका हाजमा दुरुस्त है तो आप बड़ी से बड़ी बिमारिओं से बचें रहेंगें, कपालभाति प्राणायाम आपके पाचनतंत्र को काफी मजबूत बना देता है जिससे भोजन में उपस्थित सभी पोषक तत्व आसानी से शरीर के द्वारा अवशोषित हो जातें हैं और हमारा शरीर लम्बे समय तक हृष्ट-पुष्ट बना रहता है|

  • कपालभाति प्राणायाम शरीर में यापचन दर (Metabolism rate) को विनियमित (regulate) करके कम वजन को बढ़ानें और अधिक वजन को घटानें में मदद करता है|  
  • शरीर, मस्तिष्क और ऊर्जा नाड़ियों के अवरोधों को खोलता है|
  • अपान वायु को संतुलित करता है|
  • पेट से सम्बंधित सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है| 
  • चेहरे पर प्राकृतिक तेज (चमक) बढ़ाता है|
  • पाचनतंत्र को मजबूत करता है जिससे आपका शरीर खानें में मौजूद पोषक तत्वों को अच्छी तरह से अवशोषित करता है|
  • पेट में जमी चर्बी को घटानें में मदद करता है|
  • शरीर और मन को जागृत करता है और क्रियाशील बनाता है|
  • फेफड़े और श्वास प्रणाली में उपस्थित अशुद्धियों और अवरोधों को मिटाता है|
  • शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है और मौजूद अशुद्धियों (विषैले पदार्थ) को दूर करता है|
  • दमे (अस्थमा) के मरीजों के लिए कपालभाति रामबाण के समान है|
  • साइनस (Sinus) को साफ़ है और उसमें साइनस की बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है|
  • अत्यधिक तनाव (Hypertension) को कम करता है, बुरे कोलेस्ट्रॉल (LDL – Low-density lipoprotein)  को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL – High density lipoprotein) को बढ़ाता है|
  • गुर्दे, लीवर, आमाशय, आँत, मलमूत्र, हृदय, फेफड़े, थायरॉइड इत्यादि से सम्बंधित हर बीमारीओं को दूर करता है|
  • शरीर में हीमोग्लोबिन(Himoglobin) की कमी को दूर करता है|
  • यदि शरीर में किसी पोषक तत्त्व की कमी है तो उसकी कमी को प्राकृतिक रूप से सुधारता है|
  • पुरुषों और औरतों में बांझपन की समस्या से मुक्ति मिलती है|
  • शीघ्रपतन (Premature ejaculation) और स्वप्नदोष (Night Fall) की समस्या से निजात दिलाता है|
  • औरतों के uterus में फ़िब्रोइद्स (Fibroids) और ओवरी (Ovary) में सिस्ट (Cyst) से सम्बंधित समस्या दूर करता है|
  • औरतों में मासिकधर्म (Mensuration Periods) के समय में अनियमितता तथा मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक खून आने जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है|
  • मन को ध्यान के लिए तैयार करता है|
  • शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है|
  • व्यक्ति को ऊर्ध्वरेता बनाता है और कुण्डलिनी जागरण में मदद करता है|
  • शरीर को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बना रहता है|
  • वात, पित्त और कफ को संतुलित करता है|
  • पुरुषों और महिलाओं के प्रजनन तंत्र से सम्बंधित समस्याओं को समाप्त करता है|
  • पथरी के प्राकृतिक इलाज के लिए कपालभाति बहुत उपयुक्त है|
  • हड्डियों और जोड़ों से सम्बंधित रोगों को जड़ से मिटाता है|            

कपालभाति कैसे करे – how to do kapalbhati pranayama in hindi

Step #1. सबसे पहले किसी ऐसी जगह को चुनें जहाँ ताजी हवा आती हो, जगह साफ-सुथरी हो यदि आसपास पेड़-पौधे मौजूद हों और सूर्य का प्रकाश पहुँचता हो तो शास्त्रों के अनुसार ऐसी जगह योग, प्राणायाम और ध्यान करनें के लिए बहुत उपयुक्त मानी गयी है|

Step #2. अब धरती पर आसन बिछा लें, आसन के तौर पर आप चटाई, दरी या योगा मैट (Yoga Mat) का इस्तेमाल कर सकतें हैं|  

Step #3. अब आसन पर पद्मासन, सुखासन या वज्रासन की स्थिति में बैठ जायें और अपने शरीर को ढ़ीला छोड़ दें, मन को शांत करें और चित्त को वर्तमान में लें आयें|     

Step #4. अपनी आँखों को बंद करें और ध्यान को नाक के छोर या श्वास पर एकाग्र करें| 

Step#5. अब नाक के रास्ते एक गहरी श्वास अपने पेट में भरें और अब बिना श्वास रोके पूरी श्वास को झटके के साथ नासिका से बाहर छोड दें श्वास छोड़ते समय आपको अपने पेट को सामर्थ के अनुसार अन्दर खींचना है तथा अपने प्रजनन अंग को गुदा द्वार को एक साथ ऊपर की ओर खींचना है|

इस प्रकार कपालभाति प्राणायाम की विधि का एक सेट पूरा होता है|  

निश्चित रूप से शुरुआती दिनों में यह प्रक्रिया थोड़ी कठिन लग सकती है पर जैसे जैसे आप कपालभाति प्राणायाम का नियमित अभ्यास करते रहेंगें आप कुछ ही दिनों में बड़ी सहजता के साथ कपालभाति कर लेगें|

शुरुआती दिनों में आपको अपने सामर्थ के अनुसार प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिये फिर नियमित अभ्यास के साथ अपनी अवधि को धीरे धीरे बढ़ाते रहें|  

कपालभाति कब करें | Kapalbhati Kab Kare

योग शास्त्रों के अनुसार प्राणायाम करने का सबसे उचित समय भोर का होता है, यदि आप नियमित रूप से सही तरीके से भोर में प्राणायाम करतें हैं तो आपको इसका अधिकतम लाभ मिल सकेगा|

क्योंकि भोर के समय वातावरण में सकारात्मकता ज्यादा होती है, सद्गुण का प्रभाव ज्यादा होता है, शरीर में वात अधिक सक्रिय होता है और वातावरण भी शुद्ध होता है|

परन्तु आज कल की जीवनशैली में भोर में उठ पाना सभी के लिए संभव नहीं है ऐसी परिस्तिथियों में आप जितनी जल्दी हो सके सुबह प्राणायाम कर लें|

यदि सुबह प्राणायाम कर पाना संभव नहीं है तो शाम के समय (गोधुल बेला) भी आप प्राणायाम कर सकतें हैं पर कपालभाति करनें के 3 से 4 घण्टे पहले कुछ भी खाना या पीना पूर्णतया निषेध है|

कपालभाति से हानि – kapalbhati side effects

वैसे तो कपालभाति प्राणायाम एक बहुत ही आसान और साधारण प्राणायाम है परन्तु यदि कपालभाति को ढंग से नहीं किया गया तो इसके काफी नकारात्मक परिणाम भी देखनें को मिलतें हैं|

इसलिए आपको कपालभाति प्राणायम करनें के पहले किसी योग गुरू या डॉक्टर से सलाह अवश्य लेना चाहिए तथा कपालभाति प्राणायाम के नुकसान (Sideeffects of Kapalbhaati) से बचनें के लिए निम्न सावधानियॉं बरतनी चाहिये|

कपालभाति के दौरान सावधानियाँ  – Precautions for Kapalbhaati Pranayama 

  • यदि आप पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर से परामर्श लेनें के बाद ही कपालभाति करें|
  • गर्भवती महिलाओं को कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए|
  • मासिक धर्म के दौरान कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए|
  • यदि आपका कोई ऑपरेशन हुआ है तो कपालभाति नहीं करना चाहिए|
  • हर्निया कि समस्या होनें पर कपालभाती प्राणायम नहीं करना चाहिए।
  • यदि किसी को अल्सर है तो आपको प्राणायाम का अभ्यास बिलकुल भी नहीं करना चाहिये अन्यथा  फायदे से ज्यादा नुकसान भी हो सकता है|        
  • कपालभाति प्राणायाम का अभ्यास बिलकुल ही खाली पेट करना चाहिए|
  • प्राणायाम करते दौरान शरीर का कोई भी भाग जमीन अथवा दीवार से छूना नहीं चाहिये|

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तो आप कपालभाति करना कब प्रारम्भ कर रहें हैं|

धन्यवाद।

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