Cupping therapy |Beauty tips in Hindi

Cupping therapy में दर्द तो होता है , लेकिन ब्यूटी पूरी तरह निखर आती है , यह मानना है बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला का | उर्वशी को यह थेरेपी बेहद भाती है | इनके अलावा दिशा पटानी और वीडियो जॉकी बानी भी इस थेरेपी की दीवानी है | कैसे की जाती है यह थेरेपी आप भी जानिए :

Cupping therapy में शीशों के कपो का यूज :

Cupping therapy

Cupping therapy में एक खास तरह के शीशों के कपों का यूज किया जाता है | दरसल इसमें शीशे का कप यूज करके वैक्यूम पैदा किया जाता है | ताकि कप बॉडी से चिपक जाये | हालाँकि अब इसके लिए मशीन का यूज किया जाने लगा है | कपिंग करने के पांच मिनट बाद दूषित खून इन कप्स के नीचे जमा हो जाता है | इसके बाद जमा हुए दूषित खून को निकाल दिया जाता है | इस थेरेपी को करवाने के दो से तीन दिन बाद स्किन शाइन करने लगती है | इसका असर तीस से 45 दिन तक बना रहता है | कपिंग फेस पर, दोनों गाल, माथे, चिन और बॉडी पर जहाँ चाहे वहां आप करवा सकती है | अगर हेल्थ की वजह से करवा रही है, तो जिस पॉइंट पर बीमारी की पहचान होती है , वहीँ पर कपिंग की जाती है | अगर बीमारी शुरुवाती हो , तो दो सेटिंग में ही आपको काफी हद तक फायदा हो जाता है | वरना तीन से चार सेटिंग्स की जरुरत होती है |

हेल्थ प्रॉब्लम में इसका यूज :

कमर दर्द | स्लिप डिस्क | सर्वाइकल डिस्क | पैरों की सूजन | सूनापन और झनझनाहट के लिए भी इस थेरेपी का यूज काफी फायदेमंद है |


इस थेरेपी का यूज लोग बॉडी को रिलैक्स देने के लिए और टेंशन से निजात पाने के लिए भी करने लगे है | इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बढता है | दरसल इसमें इस्तेमाल किये जाने वाले गरम बर्तन से स्किन में खिंचाव आता है, जो ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा कर स्किन को रिएनर्जेटिक कर देता है |

इस थेरेपी के तहत प्रॉब्लम को ख़तम करने के लिए ब्लड में बैलेंस बनाकर चलते है | इसमें सबसे पहले मरीज का जरुरी ब्लड टेस्ट किया जाता है और उससे संबन्धित बीमारी का एक्स रे कराया जाता है |

ऐसे होता है इलाज :

बीमारी के अनुसार गर्दन या गर्दन के नीचे या पीठ में कपिंग के जाती है | पहले इसे कुल्हड़ से किया जाता था , लेकिन अब कप से किया जाने लगा है | काम हवा वाला दबाव बनाने के लिए कप को गरम कर या कप के अंदर मौजूद हवा व् लौ की मदद लेकर या फिर कपों को गर्म सुगन्धित तेलों में डुबाकर त्वचा पर लगाया जाता है और जैसे जैसे कप के अंदर मौजूद हवा ठंडी होती है | यह त्वचा को सिकोड़ती है और थोड़ा अंदर की ओर खींच लेती है | कांच के अलावा मार्किट में अब रबड़ कप भी मौजूद है |


ब्यूटी एक्सपर्ट कहते है कि Cupping therapy सामान्य रूप से सॉफ्ट वाली जगह पर ही की जाती है | ट्रीटमेंट के बाद कप को हटाने के बाद इसके निशान रह जाते है | यह साधारण लाल छल्ले की तरह होते है | जो एक से दो दिन बाद खुद ब खुद हट जाते है | कपिंग थेरेपी अभी इंडिया में उतनी पॉपुलर नहीं है पर इसके फायदों को देखते हुए अब इसे यहाँ भी पसंद किया जाने लगा है |

कपिंग ३ तरह की होती है : ड्राई कपिंग, वेट कपिंग और फायर कपिंग
  • वेट : वेट कपिंग ज्यादा प्रचलित है |
  • ड्राई कपिंग को सीधे स्किन पर लगाया जाता है, वहीँ वेट कपिंग में वेट देकर कपिंग की जाती है |
  • तीसरी फायर कपिंग में ७० प्रतिशत एलकोहल में कॉटन बॉल को भिगोया जाता है और फिर इसे जलाकर कप की मदद से कपिंग थेरेपी की जाती है |

चीन से हुई पॉपुलर :

Cupping therapy को चीन में बेहद पसंद किया गया | वहां पर यह इतनी पॉपुलर है कि उन्होंने इस थेरेपी में कुछ चीज़े नयी जोड़कर इसे और भी बेहतरीन बनाया है | यहाँ पर इसे चाइनीज मसाज के नाम से भी जाना जाता है | इसके फायदों को देखते हुए अब यह इंडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया होता हुआ अमेरिका, यूरोप और अरब देशों में भी पसंद की जा रही है |

Sachin Agarwal

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