भ्रामरी प्राणायाम – Bhramari pranayama in hindi

संस्कृत भाषा में मधुमक्खी (Honey Bee) को भ्रामरी बोला जाता है और इसी नाम के आधार पर इस प्राणायाम का नाम भ्रामरी प्राणायाम (Humming Bee) रखा गया है| क्योंकि भ्रामरी प्राणायाम के दौरान हम मधुमक्खी के समान भनभनानें (Humming Noise) की ध्वनि निकालते हैं जिससे हमारे मन और मस्तिष्क को काफी शान्ति मिलती है और तनाव दूर होता है|

योग शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद उदान वायु जिसका सीधा सम्बन्ध मस्तिष्क की गतिविधियों से होता है, यदि किसी कारणवश अनियंत्रित हो जाती है तो हमें विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों का सामना करना पड़ता है| 

भ्रामरी प्राणायाम इसी उदान वायु को नियंत्रित करनें का रामबाण उपाय है| 

योग गुरू स्वामी रामदेव के अनुसार यदि कोई मनुष्य भ्रामरी का नियमित रूप से अभ्यास करता है तो लम्बे समय तक उसका मस्तिष्क सक्रिय रहता है और ऐसा मनुष्य सभी प्रकार के मानसिक रोगों से भी दूर रहता है|  

भ्रामरी प्राणायाम के लाभ – Bhramari pranayama benefits in hindi

भ्रामरी प्राणायाम का सही तरीके से नियमित अभ्यास करने पर आपको कुछ ही दिनों में निम्नलिखित फायदे दिखायी देगें –

  • भ्रामरी के अभ्यास से आपको तत्क्षण क्रोध, निराशा और घबराहट से छुटकारा मिलता है|
  • जो लोग अत्यधिक तनाव या अवसाद का सामना कर रहें हैं उनके लिए भ्रामरी प्राणायाम रामबाण के समान है| 
  • आपको घबराहट और बेकार की चिंता से मुक्ति दिलाता है|
  • आपके चित्त को वर्तमान में स्थित करता है, और भूत तथा भविष्य की चिंताओं से निजात दिलाता है|
  • आत्मविश्वास को बढ़ाता है और आपके व्यक्तित्व को आकर्षक बनाता है|
  • माइग्रेन और साधारण सिरदर्द से मुक्ति दिलाता है|
  • फोकस, एकाग्रता और याददाश्त बढ़ानें में मदद करता है|
  • आपके मन को शांत करता है और ध्यान के लिए तैयार करता है|
  • रक्तचात (Blood Pressure) को नियंत्रित करता है और तो और भय (Fobia) से भी मुक्त करता है|
  • अनिद्रा जैसी समस्या को दूर करता है|
  • तंत्रिका तंत्र (Neural system) को मजबूत करता है और उससे सम्बंधित सभी रोगों से निजात है|
  • सेक्स ऊर्जा को ऊपर की ओर गति करवाताहै जिससे आपकी रचनात्मक और विश्लेषण दोनों शक्तिओं का विकास होता है|

भ्रामरी प्राणायाम न तो केवल आपके मस्तिष्क को काफी मजबूत बना देता है बल्कि अवचेतन मन द्वारा किये जानें वाली शारीरिक गतिविधियों जैसे श्वास लेना, पाचन करना, आदि के लिए भी बहुत कारगर है|

इसका नियमित अभ्यास करनें वाले व्यक्ति को कब्ज, अपचन जैसी समस्याओं से बहुत राहत मिलती है|     

इस प्रकार भ्रामरी एक बहुत ही चमत्कारी प्राणायाम है| परन्तु इसका अधिकतम लाभ पानें के लिए यह बहुत आवश्यक है कि हम सही तरीके से नियमित रूप से इसका अभ्यास करें|

आईये जानतें हैं कि भ्रामरी प्राणायाम कैसे किया जाता है|

भ्रामरी प्राणायाम कैसे करें – Bhramari pranayama steps in hindi

भ्रामरी प्राणायाम का सही अभ्यास करनें के लिए आपको नीचे दिये गए चरणों (Steps) का क्रमबद्ध तरीके से पालन करना चाहिए…

Step #1. सबसे पहले किसी ऐसी साफ सुथरी और शान्त जगह का चुनाव करें जहाँ सूर्य का प्रकाश तथा ताजी हवा पहुँचती हो और आसपास पेड़ पौधे हों|

Step #2. धरती पर आसन (चटाई, योगा-मैट अथवा दरी) बिछा लें और उस पर पद्मासन, सुखासन या वज्रासन लगा कर बैठ जाएं|

Step #3. ध्यान को श्वास पर एकाग्र करें, मन को शांत करें और चित्त को वर्तमान में ले आयें|

Step #4. अब धीरे धीरे गहरी और लम्बी श्वास नाक के द्वारा अपने फेफड़े में भरें और मुँह बंद किये हुए मधुमक्खी की भनभनाहट जैसी आवाज निकालते हुए धीरे धीरे सहज रूप से श्वास बाहर छोड़ें|

Step #5. पूरी तरीके से श्वास छोड़ देनें के बाद यथाशक्ति विराम ले कर दोबारा श्वास भरें और यह प्रक्रिया दोहरायें|        

Step #6. इस प्रकार शुरूआती दिनों में अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करते हुए प्राणायाम की अवधि को धीरे धीरे बढ़ाएं|

भ्रामरी प्राणायाम का अधिकतम लाभ पानें के लिए आपको भ्रामरी के साथ अनुलोम विलोम प्राणायाम का भी अभ्यास करना चाहिए| 

भ्रामरी प्राणायाम कब करें – When to do Bhramari pranayama   

योग शास्त्रों के अनुसार प्राणायाम या किसी भी योगिक क्रिया को करनें का सबसे अच्छा समय भोर का है क्योंकि भोर के समय वातावरण स्वच्छ, शांत और सात्विक होता है जिससे हमें योग (Yoga),  प्राणायाम (Breathing excercise) या ध्यान (Meditation) का अधिकतम शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है|  

फिर भी यदि भोर में उठ पाना संभव नहीं है तो आप जितनी जल्दी हो सके सुबह अभ्यास कर लें अथवा आप सांयकाल (गोधुल बेला) में भी भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कर सकतें हैं| पर यह ध्यान रहे कि अभ्यास के २ घण्टे पहले आप कुछ भी खाये – पिये न हों|

भ्रामरी प्राणायाम की सावधानियाँ  – Precautions of Bhramari pranayama     

वैसे तो भ्रामरी प्राणायाम एक बहुत ही सरल और सहज तरीके से किये जानें वाला योग है जिसको किसी भी उम्र का व्यक्ति किसी भी अवस्था में कर सकता है|

फिर भी यदि आप निम्न समस्याओं का सामना कर रहें हैं तो किसी डॉक्टर से परामर्श के बाद ही भ्रामरी का अभ्यास करें|  

  • यदि आप गर्भवती महिला हैं या आप मासिक धर्म के दौर से गुजर रहीं हों|
  • आप पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हों|
  • हाल ही में आपका कोई ऑपरेशन हुआ हो|  

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हम आशा करतें हैं कि भ्रामरी प्राणायाम से सम्बंधित यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी| आप कमेंट करके हमारा हौसला बढ़ाएं जिससे की हम आगे भी आपके लिए अच्छी से अच्छी पोस्ट लेकर आयें| 

यदि आपको इस लेख में कोई सुधार या सुझाव नज़र आता है तो हमें संपर्क करें हमारी टीम जल्द से जल्द उचित सुधार करने का प्रयत्न करेगी|

 

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