भस्त्रिका प्राणायाम – Bhastrika pranayam in Hindi (Bellows breathing exercise)

भस्त्रिका शब्द का हिंदी में तात्पर्य लोहार (Blacksmith) द्वारा इस्तेमाल की जानें वाली धौंकनी (Blower) से है, जिसका उपयोग लोहार लोहा तपाने वाली अग्नि को और तीव्र करनें के लिए करता है| 

क्योंकि भस्त्रिका प्राणायाम के दौरान भी हमें धौंकनी के समान ही तीव्र गति से श्वास भर कर उसी गति से बाहर छोड़नी होती है जिससे शरीर में मौजूद अग्नि तीव्र होती है और शरीर में उपस्थित विभिन्न प्रकार की समस्याओं को दूर करती है|    

भस्त्रिका योग (Bhastrika yoga in hindi) की प्रक्रिया की समानता धौंकनी के तरह (जिसे संस्कृत में भस्त्रिका कहा जाता है) ही होनें के कारण इसका नाम भस्त्रिका प्राणायाम रखा गया है|

योग ग्रन्थ घेरंडसंहिता में भस्त्रिका प्राणायाम को कुछ इस प्रकार बताया गया है…

“जिस प्रकार लोहार की धौंकनी निरंतर फुलती-पिचकती रहती है, उसी प्रकार आप दोनों नासिकाओं से वायु अंदर लीजिए और फेफड़े में भरिये, उसके बाद धौंकनी की तरह तीव्र गर्जना (आवाज) के साथ तेजी से बाहर छोड़ दीजिये।“

…घेरंडसंहिता

शुरुआती कुछ दिनों में यह प्रक्रिया थोड़ी असहज लग सकती है परन्तु जैसे जैसे आप इसका अभ्यास करते रहेंगें कुछ ही दिनों में आप भस्त्रिका प्राणायाम बड़ी ही सहजता से कर ले जाएंगे| 

आइये इस लेख के माध्यम से जानतें है कि भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ क्या है, इसे किस प्रकार किया जाता है तथा भस्त्रिका प्राणायाम करते दौरान हमें क्या सावधानियाँ रखनी चाहिये| 

भस्त्रिका प्राणायाम के लाभ – Bhastrika pranayam benefits in Hindi

योग शास्त्रों के अनुसार जिस प्रकार लोहार की भस्त्रिका (धौंकनी) लोहा तपाने वाली अग्नि को तीव्र करती है उसी प्रकार भस्त्रिका प्राणायाम मनुष्य के शरीर में उपस्थित अग्नि को तीव्र करती है|

हमें भस्त्रिका प्राणायाम के निम्नलिखित फायदे (Benefits of Bhastrika pranayama in Hindi) देखनें को मिलते हैं…  

  • तीव्र अग्नि के कारण पित्त का प्रभाव बढ़ जाता है जिससे व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है|
  • व्यक्ति का दिमाग और चेतना बहुत सक्रिय हो जाता है| 
  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है| 
  • शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ (विषैले पदार्थ) दूर होतीं है| 
  • जुकाम, कफ और गले में खराश जैसी समस्याओं से राहत मिलती है|  
  • शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है|
  • प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है| 
  • जाड़े के मौसम में ठंड लगने से बचाता है| 
  • शरीर की सभी कोशिकाओं में पर्याप्त मात्रा में प्राणऊर्जा का संचार होता है|  
  • व्यक्ति की याददाश्त, एकाग्रता और फोकस में वृद्धि होती है|      
  • व्यक्ति का फेफड़ा तथा श्वसन तंत्र मजबूत होता है| 
  • पाचन तंत्र मजबूत होता है जिससे भोजन में उपस्थित पोषक तत्वों का अवशोषण अच्छे से होता है|  
  • त्वचा में चमक आती है और त्वचा में होनें वाला संक्रमण (Fungal Infection) दूर होता है|  
  • निरंतर अभ्यास से व्यक्ति ऊर्ध्वरेता बनता है अर्थात उसकी सेक्स ऊर्जा ऊपर की ओर गति करती है जिससे रचनात्मक और विश्लेषण शक्ति बढ़ती है|
  • अत्यधिक काम वासना में कमी आती है और मस्तिष्क पर नियंत्रण बढ़ता है|  
  • कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है जिससे व्यक्ति आध्यात्म की परम अवस्था तक पहुँच जाता है|

यह भस्त्रिका प्राणायाम के कुछ लाभ हैं परन्तु इसका अधिकतम लाभ पानें के लिए यह अतिआवश्यक है कि आप प्राणायाम निरंतर रूप से सही तरीके से करें|

तो आइये जानतें हैं कि भस्त्रिका प्राणायाम कैसे करते हैं (how to do bhastrika pranayama in hindi). 

भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका – Bhastrika pranayama steps in Hindi

भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए आपको निम्नलिखित चरणों (Bhastrika pranayama steps in Hindi) का क्रमबद्ध तरीके से पालन करना चाहिए… 

Step #1: सर्वप्रथम किसी ऐसी साफ-सुथरी जगह का चुनाव करें जहाँ ताज़ी हवा आती हो, सूर्य का प्रकाश पहुँचता हो और यदि आसपास पेड़ पौधे मौजूद हों तो ऐसी जगह को योगाभ्यास करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है|   

Step #2: जमीन पर आसन (दरी, चटाई अथवा योगा – मैट) बिछायें और पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं|

Step #3: अब अपने हाथ को ध्यान या वायु मुद्रा में घुटनों पर रख लें और मन को शांत करें और चित्त को वर्तमान स्थिति में ले आएं|

Step #4: अब 2 से 3 बार गहरी श्वास लेकर अपने आपको प्राणायाम के लिए तैयार करें| 

Step #5: अब अपने फेफड़े में नाक द्वारा यथाशक्ति धीरे धीरे गहरी श्वास भरें और पूर्णतया श्वास भर जानें के बाद बिना रोके श्वास को तीव्र झटके के साथ नाक से छोड़ दें, ऐसा आपको 10 बार लगातार करना है|

Step #6: 10 बार यह प्रक्रिया पूरी हो जानें के बाद आप 2 से 3 गहरी स्वास लें|

Step #7: सम्पूर्ण प्रक्रिया में आपको यह ध्यान रखना है कि आपका मुँह बंद ही रहना चाहिए अर्थात श्वास लेनें और छोड़नें की सारी प्रक्रिया नाक से ही करनी है| 

इस तरह भस्त्रिका प्राणायाम का एक सेट पूरा हो जाएगा|

शुरुआती दिनों में आप एक बार में यथाशक्ति 5 से 10 सेट कर सकते हैं|    

फिर धीरे धीरे अपनी गति और अवधि को बढ़ाएं|    

ऊपर दी गयी विधि स्वयं योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा बताई गयी है जिसको आप इस video से भी समझ सकतें हैं|

ध्यान रहे, किसी भी प्राणायाम का अभ्यास करने के पहले यह अतिआवश्यक है कि आपको उससे सम्बन्धित नुकसान और सावधानियों का भी ज्ञान हो अन्यथा आपको प्राणायाम के फायदे से ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ सकता है|   

तो आइये जानतें हैं कि भस्त्रिका प्राणायाम के नुकसान क्या हैं और भस्त्रिका प्राणायाम करते दौरान हमें किन सावधनियों का ध्यान रखना चाहिए…

भस्त्रिका प्राणायाम के नुकसान – Bhastrika pranayama side effects

भस्त्रिका प्राणायाम का मुख्य उद्देश्य शरीर में अग्नि तत्त्व को बढ़ाना है परन्तु जिस व्यक्ति की अग्नि पहले से ही तीव्र हो उसके लिए भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास नुकसानदायक हो सकता है| ऐसे व्यक्ति को निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है…

  • जरुरत से ज्यादा बार बार भूख लगना|
  • व्यर्थ के विचार अत्यधिक आना|
  • दिमाग अशांत होना|
  • रक्तचाप में वृद्धि|
  • अत्यधिक गर्मी लगना|
  • बहुत पसीना आना|

कुल मिला कर पित्त प्रधान (जिसके शरीर में अग्नि तत्त्व ज्यादा हो) व्यक्ति यदि भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करता है तो उसका पित्त दोष भड़क जाता है शरीर में पित्त से सम्बंधित रोग होनें का खतरा बढ़ जाता है|   

भस्त्रिका प्राणायाम की सावधानियाँ – Precaustions for Bhastrika Pranayama      

ऊपर बताये गए नुकसान से बचने के लिए आपको भस्त्रिका प्राणायाम के दौरान निम्नलिखित सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए…   

  • यदि आप उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित हैं तो आपको भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए अन्यथा आपकी स्थिति बिगड़ सकती है| 
  • यदि आपका हाल ही में कोई ऑपरेशन हुआ हो तो आपको भस्त्रिका प्राणायाम नहीं करना चाहिए|
  • महिलाओं को गर्भावस्था अथवा मासिक धर्म के दौरान यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए| 
  • शुरूआत में यह प्राणायाम धीरे धीरे करें बाद में अभ्यास के अनुसार यथाशक्ति गति और अवधि दोनों को बढ़ायें| 
  • यह प्राणायाम हमेशा पूरी तरह से खाली पेट ही करना चाहिए|
  • यदि आप पहले से किसी गंभीर बिमारी से पीड़ित हैं तो डॉक्टर से परामर्श करनें के बाद ही भस्त्रिका प्राणायाम करें| 
  • टीबी, अल्सर, दमा, पथरी, मिर्गी, हार्निया, से ग्रस्त व्यक्ति को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए|
  • यदि आपकी नाक बंद है, आप साइनस से ग्रसित हैं या आपके नाक की हड्डी बढ़ी हो तो आपको डॉक्टर से सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए|  
  • अभ्यास के दौरान चक्कर आनें पर, घबराह्ट अथवा उल्टी महसूस होनें पर आपको अभ्यास तुरंत रोक देना चाहिए|   

और पढ़ें…

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी यह पोस्ट (भस्त्रिका प्राणायाम) पसंद आयी होगी कृपया कमेंट करके हमारा मनोबल बढ़ाएं जिससे हम भविष्य में भी आपके लिए ऐसी पोस्ट लाते रहें|

यदि आपको कोई त्रुटि नज़र आती है तो हमें संपर्क करें हमारी टीम जल्द से जल्द सुधार करने का प्रयास करेगी|

धन्यवाद।

Leave a Comment